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एक बेहतरीन हिंदी न्यूज पोर्टल कैसा हो? प्लेटफॉर्म, सुविधाएं, यूजर-इंटरैक्शन, होस्टिंग और भी बहुत कुछ… How to start a news portal?

आज के समय में यह बात लगभग साबित हो गयी है कि भारत में हिंदी ही एकमात्र भाषा है जो सबसे ज्यादा बोली और समझी तो जाती ही है, साथ ही साथ इंटरनेट पर अब यह इतनी ही सुगमता से उपलब्ध है, जितनी सुगमता से अंग्रेजी या कोई अन्य भाषा. चूँकि, इंटरनेट पर हिंदी में सहजता कुछ ही वर्ष पहले आयी है तो इसमें करने के लिए काफी कुछ अपॉरचुनिटी नज़र आती है. हज़ारों विषय ऐसे हैं, जिनके बारे में बेहतर तरीके से अगर आप कंटेंट ही डालते हैं तो आपकी वेबसाइट लगातार अपडेट होने से जल्द ही टॉप-वेबसाइट की श्रेणी में आ जाएगी. अगर आप किसी एक विषय को चुनकर, उसके विभिन्न पक्षों को अंग्रेजी से हिंदी में, अपने शब्दों में अनुवाद ही करते हैं तो आपके पास बेहतरीन कलेक्शन उपलब्ध होगा. अगर, आप लेखक/ कवि हैं तो आप अपनी रचनाओं को लगातार अपडेट करके अपने पोर्टल को ऊंचाई तक पहुंचा सकते हैं. अगर आप पत्रकार हैं तो ब्रेकिंग या एक्सक्लूसिव न्यूज से तमाम संस्थानों को अपनी खबरें दे सकते हैं या सेल कर सकते हैं. जब आपके पास, आपकी ही भाषा में एक बेहतरीन वेबसाइट रेगुलर अपडेट होती है तो यकीन मानिये आप एक बढ़िया ऑनलाइन माध्यम विकसित कर चुके हैं, जो आपको बेहतरीन कमाई देने के लिए बिलकुल तैयार है. नीचे कुछ बिन्दुओं पर गौर करेंगे, जो एक बेहतरीन न्यूज-व्यूज पोर्टल के लिए लाभकारी साबित हो सकता है:

  1. विषय का चुनाव: अगर आप सच में कंटेंट बेस्ड ऑनलाइन पोर्टल बनाने की ठान चुके हैं तो विषय का चुनाव सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है. ध्यान रहे, इंटरनेट अपने आप में एक बहुत बड़ा संसार है, जहाँ प्रत्येक चीज पहले से ही उपलब्ध है, तो जब तक आप के दिमाग में स्पेसिफिक सब्जेक्ट नहीं है, अलग प्रजेंटेशन नहीं है, तब तक आगे की राह कठिन ही नहीं, बल्कि खुद को भ्रम में रखने जैसी ही है. आप किसी अंग्रेजी की वेबसाइट पर आर्टिकल पढ़ जरूर सकते हैं, उससे आईडिया भी ले सकते हैं, किन्तु हूबहू कॉपी-पेस्ट आपको नीचे ले जाएगा. अपने सब्जेक्ट की समझ लगातार विकसित करना यहाँ बेहद आवश्यक है. इसी तरह अगर आप न्यूज पोर्टल बना रहे हैं तो यह न सोचें कि आजतक, कल तक या जागरण जैसी किसी वेबसाइट से कॉपी-पेस्ट करके आप अपनी वेबसाइट को ऊंचाइयों तक पहुंचा देगी? बल्कि, इसके लिए आपको ख़बरों को अलग नज़रिये से पेश करना होगा, उसमें नयी जानकारियां जोड़नी होंगी, अगर एनालिटिकल डाटा दे सकें तो और बढ़िया होगा और अगर उस विषय पर लेख आ जाये, तस्वीरों के माध्यम से उसकी व्याख्या आ जाये तो सोने पर सुहागा. कुल मिलाकर, आपकी वेबसाइट, आपकी लगनी चाहिए ताकि पाठक-वर्ग को कुछ नया मिले और वह आपकी वेबसाइट पर आकर निराश न हो!
  2. प्लेटफॉर्म का चुनाव: मार्किट में तमाम प्रोग्रामिंग लैंगुएज, सीएमएस और कस्टम सल्यूशन उपलब्ध हैं, किन्तु अगर आपको कम पैसे में परफेक्ट सल्यूशन और बेहतरीन फीचर चाहिए तो आप निश्चिन्त होकर वर्डप्रेस प्लेटफॉर्म को इस्तेमाल कीजिये. आसान, ओपन-सोर्स, अंतराष्ट्रीय मानक, ब्रेकिंग न्यूज से लेकर कैटगरी-ऑप्शंस, सैकड़ों मुफ्त प्लगिन्स जो आप डेवेलप कराने जाएँ तो लाखों लग सकते हैं, बैकप ऑप्शन, एससीओ ऑप्शन, फोटो-वीडियो गैलरी ऑप्शन इत्यादि तमाम फीचर तो आपको मिलेंगे ही, साथ ही साथ अगर आप डिज़ाइन में बहुत अधिक छेड़छाड़ नहीं कराते हैं तो आपको यह शुरूआती स्तर पर सस्ता भी पड़ेगा. सबसे बड़ी बात की अगर भविष्य में आप किसी और प्लेटफॉर्म पर जम्प करना चाहें तो आपकी वर्डप्रेस वेबसाइट का डेटा आसानी से माइग्रेट हो जायेगा.
  3. प्रमोशन टेक्निक्स: शुरुआत में जब तक आपकी वेबसाइट पर 100 से ज्यादा क्वालिटी पोस्ट न हो जाएँ तब तक इसका प्रमोशन करना ‘बाउंस-बैक’ करता है. अगर किसी एक पोस्ट के लिंक से आपकी वेबसाइट पर ऑडियंस आता है तो पोर्टल पर कम से कम इतनी सामग्री अवश्य हो जो ज्यादे से ज्यादे समय तक आपके पाठक को रोके रख सके. धीरे-धीरे आप फेसबुक, ट्विटर जैसे तमाम सोशल मीडिया से ग्राहकों को वेबसाइट पर ला सकते हैं तो वीकली या मंथली कंटेंट का न्यूजलेटर भेजना आपकी वेबसाइट को जबरदस्त तरीके से बूस्ट करता है. निश्चित रूप से आपकी वेबसाइट पर कमेंट बॉक्स में प्रतिक्रिया आने पर आपको इसका अंदाजा होगा तो वेबसाइट स्टेट्स से आपको कस्टमर का टेस्ट पता चल सकता है. एनालिटिक्स पर बारीक निगाह गड़ाएं रखें.   फिर कम से कम 1000 क्वालिटी पोस्ट होने के बाद आप पेड-प्रमोशन की तरफ भी ध्यान दे सकते हैं जिसमें गूगल एडवर्ड/ फेसबुक प्रमोशन इत्यादि शामिल हैं.
  4. डिज़ाइन / कस्टमाइजेशन: अगर आपकी वेबसाइट पर ट्रैफिक आने लगता है, एडसेंस इत्यादि से अर्निंग शुरू हो जाती है, फिर आप यूनिक डिज़ाइन, कस्टमाइजेशन की तरफ जा सकते हैं, जिससे कस्टमर को नया लुक और बेहतर से बेहतर एक्सेस मिल सके. यह पॉइंट मैंने अंतर में इसलिए रखा है, क्योंकि अगर शुरू में ही आप डिज़ाइन पर अँटक जाते हैं तो कंटेंट से आपका फोकस हट जाता है, साथ ही साथ शुरू में एक अच्छी खासी इन्वेस्टमेंट भी हो जाती है, जिसका कोई तुक नहीं होता. ध्यान रहे, कस्टमर आपकी वेबसाइट पर आपके विचारों, एक्सक्लूसिव ख़बरों को पढ़ने के लिए आएगा, न कि लाल-पीला-नीला डिज़ाइन देखने. इसलिए अपना ध्यान बेहतर कंटेंट पर फोकस करें.
  5. ब्रांडिंग: उपरोक्त सभी पॉइंट्स से गुजरने के बाद आपको अहसास हो जायेगा कि आपके मॉडल में कितना दम है. अगर उसमें पोटेंशियल दिखता है तो उसकी हर स्तर पर ब्रांडिंग शुरू कर सकते हैं. मीडिया घरानों से पब्लिसिटी करा सकते हैं तो इन्वेस्टर या वेंचर कैपिटलिस्ट की मदद से आगे के बड़े सपनों के ऊपर छलांग लगा सकते हैं. फिर आपके ऑनलाइन माध्यम के साथ ऑफलाइन मॉडल भी जुड़ सकता है. जैसे, अगर आप न्यूज पोर्टल ही चलाते हैं तो उसके सफल होने पर आप किसी सहयोगी के इन्वेस्टमेंट से अखबार शुरू कर सकते हैं. अगर आपके आर्टिकल हिट हैं तो आप मैगजीन शुरू कर सकते हैं. अगर आप ट्रेवल ब्लॉग के माध्यम से पॉपुलर हो गए हैं तो टूरिज्म कंपनी के माध्यम से सर्विस दे सकते हैं या फिर अगर आप की वेबसाइट फूडिंग/ रेसिपीज के बारे में है तो फिर आप रेस्टोरेंट शुरू कर सकती हैं. डिपेंड करता है, किस हद तक आपने कॉन्फिडेंस गेन किया है और अंततः आपका पोर्टल आपको यह बता देता है कि आप कितने पानी में हैं. यकीन कीजिये, अगर आपने सीरियसली और डेडिकेटली अपने पोर्टल को 1 साल का समय दे दिया तो आपके सामने एक बड़ा मैदान होगा, जहाँ आपकी महत्वाकांक्षाएं सच हो सकती हैं. आप अपने विचार, सुझाव मुझे मेल कर सकते हैं. मेरी मेल आईडी है: mithilesh2020@gmail.com; Ph. 9990089080; Web: www.mithilesh2020.com

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